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मनुष्यों की क्षमता capacity of humans


मनुष्यों की क्षमता:- सभी जीवो में मानव जीवन को सबसे बहुमूल्य एवं दुर्लभ जीवन माना गया है यह वही जीवन है जिसे पाने हेतु कभी भगवन विष्णु इस धरती पर राम , कृष्ण जैसे अवतार लेते है , एवं इस मानव जीवन एवं इसके सुखो का आनंद लेते है , यह वह जीवन है जिसका लाभ देवता, असुर , दानव को भी प्राप्त नहीं होता है , क्युकी इस मानव जीवन द्वारा ही मनुष्य जीवन मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष अर्थात परमात्मा में विलीन हो सकते है इससे मनुस्य ही ऐसे जीव मात्रा है जिसे वाणी अवं दिमाग से ही ज्ञान को बढ़ाने की शक्ति प्रदान की है , वह अपने मस्तिष्क शक्ति का ४% भी खर्च नहीं करता यदि कुल पूर्ण भाग का विकास होतो वह क्या नहीं कर सकता , कलयुग में मनुष्य के केवल दो ही प्रकार है एक देव स्वरुप , और दूसरा दानव अर्थात , इन दोनों में जो अपने भीतर जिसको जयदा बढ़ाता है वह बढ़ता है,

जो क्रोध , शत्रुता ,लाभ ,निंदा , हानि अहंकार , अवसाद , हट , दुःख से बना या निर्मित है वह राक्षश है
वह मनुष्य जो अपने भीतर स्थित , मित्रता , प्रेम , शांति , दया , आशा , सुख , मानवता , समानता से बना है वह देव पुरुष है ! इस प्रकार देव पुरुष मनुष्य जो अपने स्वभाव एवं गुणों के कारण सुख , की प्राप्ति करते है ,
राक्षस स्वरुप मनुष्य दुःख एवं अपने पतन की और अग्रसर रहते है ,  
सम्पूर्ण  संसार में यह राक्षस मानव जो मांसाहार का सेवन ही मनुष्य को हिंसात्मक बनाता है 
और जो मानव शाकाहारी होता है उनके मन में शांति और समानता का भाव होता है 


इस प्रकार दो प्रकार की 
क्षमता के लोग ही संसार में है  जो  एक दूसरे के ठीक विपरीत होते है दोनों ही अपना स्वामित्व स्थापित करना  चाहते है  दोनों  अपनी अलग अलग राह पे चलते है 








english translate 

Capacity of humans: - Human life has been considered as the most precious and rare life among all the living beings, this is the life that God Vishnu incarnates on this earth like Rama, Krishna, and to enjoy this human life and its pleasures. Is, this is the life that does not benefit even the deity, dem
Because only by this human life, human life can be freed from the bondage of death and merge in salvation, that is, by this, man is the only living being who has given the power to increase knowledge through speech and brain, that is the power of his brain. The% also does not spend what it cannot do if the total whole is developed, there are only two types of human beings in the Kali-yuga, one of the Devas, and the other demon, that is, in these two, the one who increases the inner being, he grows,on, demon,


One who is made or created by anger, enmity, gain, condemnation, loss, ego, depression, hut, sorrow is demonic The man who lies within himself, made of friendship, love, peace, kindness, hope, happiness, humanity, equality, is a god. In this way, Dev Purush Man, who gets happiness due to his nature and qualities.


Human beings in the form of demons and continue to suffer and fall, In the whole world, this monster human who consumes meat only makes humans violent And humans who are vegetarian have a sense of peace and equality in their minds

Thus two types
People of ability are in the world who are just opposite each other, both want to establish their ownership, both of them walk on their own different paths.

मनुष्यों की क्षमता capacity of humans मनुष्यों की क्षमता capacity of humans Reviewed by pawan surpal on May 26, 2020 Rating: 5
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