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जैसा सोचेंगे वैसा बनेंगे ! Become what you think

जैसा सोचेंगे वैसा बनेंगे:-   ज्यादातर  लोगो का व्यवहार  उलझन भरा होता है !  क्या अपने कभी सोचा की कोई सेल्समैन कोई ग्राहक को इज्जत क्यों देता है  जबकि  वह  दूसरे ग्राहक को नजरअंदाज कर देता है ?   कोई कर्मचारी एक सुपीरियर के ादेशो का फटाफट पालन क्यों करता है < जबकि जबकि दूसरे सुपीरियर का पालन मन मानकर करता है  ? या हम किसी आदमी की बात ध्यान से क्यों सुनते है , जबकि जबकि दूसरे आदमी की बात अनसुनी कर देते है ? 
 जिन लोगो को सबसे ज्यादा सम्मान मिलता है वो अधिक सफल होते है


सम्मान लेने  का  कारन क्या है  :-  एक शब्द   में इसका जवाब दिया जाए तो इसका कारन है ''सोच''  ! सोच के कारन ही ऐसा होता है दूसरे लोग हममें वही देखते है जो हम अपने आप में देखते है ! हमें उसी तरह का व्यव्हार मिलता है जिसके काबिल हम खुद को समझते है !
सोच के कारन हे सारा फर्क पड़ता है  ! वह आदमी जो खुद को हिन्  समझता है , चाहे उसकी योग्यता कितनी भी क्यों न हो  वह हिन् हे बना रहेगा ! आप जैसा सोचते है वैसा ही काम करते है अगर कोई आदमी अपने  आपको हिन् समझता है ,  तो वह उसी तरीके से काम करेगा ! चाहे वह अपनी हीनता छुपाने का कितना ही प्रयास करे ,  यहाँ मुलभुत भावना लम्बे समय तक छुपी नहीं रह सकती  वह सचमुच महत्वपूर्ण नहीं होता

दूसरी तरफ , जो आदमी यहाँ समझता है की वह  कोई काम कर सकता है  वह सचमुच वह काम को कर लेगा

मत्वपूर्ण बनने के लिए यहाँ सोचना जरुरी है की हम महत्वपूर्ण है ! सचमुच ऐसा सोचे
! तभी दूसरे लोग भी हमारे बारे में यही सोचेंगे ! यहाँ पर में एक बार फिर तर्क देना चाहता हु

आप क्या सोचते है इससे यहाँ तय होता हिअ की आप केसा काम करते है !
आप क्या  करते है  इससे तय होता है -
दूसरे आपके साथ कैसा  व्यव्हार करेंगे 

सफलता के आपके व्यक्तिगत कार्यक्रम के दूसरे पहलुओं की तरह ही सम्मान पाना  मुलभुत रूप से बहुत आसान है !

दूसरे लोगो दूसरे लोगो से सम्मान अपने के लिए सबसे पहले यहाँ सोचना होगा की क्या आप उस सम्मान के काबिल है !  और आप अपने आप को जितने सम्मान के काबिल समझेंगे दूसरे लोग आपको उतना सम्मान देंगे !   इस सिद्धांत को आजमाकर देख ले ! क्या पके दिल में किसी गरीब और असफल आदमी के लिए सम्मान होता  है ! बिकुल नहीं क्युकी वह गरीब और असफल आदमी खुद का सम्मान नहीं करता वह आत्मा सम्मान के आभाव में अपनी ज़िन्दगी बर्बाद कर रहा है आत्मा सम्मान हमारे काम में साफ दिख जाता है ! इसलिए
हमको इस तरफ ध्यान देना पड़ेगा की हम किस तरह अपना आत्मसम्मान बड़ा सकते है <  और दुसरो से सम्मान हासिल आकर सकते है  !

महत्वपूर्ण दिखे इससे खुद को महत्वपूर्ण दिखने में मदद मिलेगी , याद आरहे की आपका व्यक्तित्व बोलता है की आप किस तरह  दीखते है इससे आपकी छवि बनती है ! सुनश्चित करले की   बाहरी व्यक्तित्व से आपके बारे में सकारात्मक छवि की बने ! घर से चलते समय पक्का करले की आप वसे हे दिख  रहे है जिस आप दिखाना चाहते है !
                                         
english  translate

You will become what you think: - Most people behave confused! Have you ever wondered why a salesman respects a customer when he ignores the other customer? Why does an employee obey the orders of one superior quickly while the other obeys the superior? Or why do we listen carefully to a man, while listening to the other person?

What is the reason for taking honor: - If it is answered in one word, it is due to "think"! It is only because of thinking that other people see in us what we see in ourselves! We get the same type of behavior that we consider ourselves worthy of! Because of thinking it makes all the difference! The man who considers himself to be a Hindu, no matter what his merit may be, will remain a Hindu! Do the same thing as you think, if a man thinks himself to be a Hindu, then he will work in the same way!

No matter how much he tries to hide his inferiority, here he can not hide his long-term sentiment, it is not really important.



On the other hand, the man here understands that he can do something, he will actually do it



To be important, it is important to think here that we are important! Really think so

! Only then will other people think about us! I want to argue here again
What do you think will decide here how you work!

What you do is determined by -

How will others treat you

Like other aspects of your personal success program, getting respect is very easy!



Respect from other people, first of all, you have to think here that you are capable of that honor! And the more respect you consider yourself worthy, the more respect other people will give you! Try this theory and see! Is there respect for a poor and unsuccessful man in his heart! Not at all

Because that poor and unsuccessful man does not respect himself. So
We have to pay attention to how we can increase our self-esteem, and we can get respect from others!

Look important, it will help you to look important, remember your personality speaks about how you look, it makes your image! Be sure of a positive image about you from the outsider personality of Surent Karle! While walking from home, make sure that you are showing what you want to show!
जैसा सोचेंगे वैसा बनेंगे ! Become what you think जैसा सोचेंगे वैसा बनेंगे !  Become what you think Reviewed by pawan surpal on May 15, 2020 Rating: 5
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